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| Wednesday 20 August, 2008 |
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yatharth (jeewan ka satya)
फूल ने कली से मुस्कुरा के कहा ,
की तेरे पर भी
बहार आएगी.
तू भी फूल
बनते- बनते यूँ ही
बिखर जाएगी.
पर कली ने
उस बात का
वो राज ना जाना
उसकी उस बात को
ज़रा सच ना माना.
पर आया जब वक़्त तो
वो फूल बन गई
मस्ती से भर के
वो यूँ ही बिखर गयी.
अपने हालात पर वो
काफ़ी दुखी थी,
कहती है फूल से ,मुझे माफ़ करो
मैं तुम पर यूँ ही हँसी थी.
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