|
|
|
|
| Wednesday 20 August, 2008 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
JANMDIN PAR SHRADHANJALI
कहलाए तुम दूत शांति केअग्रदूत तुम विशव शांति के जिओ और जीने दो के समर्थक विरोधी तुम जाति- पांती के. तुमने देखे थै कुछ सपने स्वतंत्र भारत के थै अपने अग्रणी राष्ट्र बनाने को प्रयास किए थै कुछ अपने
तुमने जो राह दिखाई थी उसपर जनता चल आई थी विकासशीलता के पथ पर चल बाढ़ उद्योगों की आई थी. देश प्रगति पथ पर चल पड़ा ध्वज शांति का लिए खड़ा तुम्हारे सपनो का भारत है आज दोराहे पर खड़ा. विशव शांति के स्वप्न तुम्हारे आज खंड- खंड पड़े हुऐ घर मैं शांति बनाने को मन जनता के त्रस्त हुऐ बात विशव की करते हो घर मैं शांति कहाँ रह पाई भारत के टुकड़े करने की लोगों के मन मैं फिर आई गाँव-गाँव शहर-शहर एक उत्पात मचा हुआ है विश्व शांति का स्वप्न तुम्हारा किसी कब्र मैं दबा हुआ है जन्म-दिवस तुम्हारा मना रहे हम दूत शांति का कहते हैं पर अशांति के सर्पों को हम दूध पिलाया करते हैं मूल्यांकन तुम्हारे कर्मो का हम आज विचारों मैं करते हैं पर अपने मूल्य भुला कर हम केवल भाषण बोला करते हैं कब तक भाषण से राष्ट्र चलेगा कब यहाँ शांति बन पाएगी तब तक भारत की जनता शायद हर पल यहाँ ठगी जाएगी जनता को स्वयं उठना होगा ध्वज शांति का लिए हुऐ तब ही राष्ट्र कह पाएगा तुम विशव शांति के दूत हुऐ जन-जन मैं जब शांति व्यापेगी जनता निर्द्वन्द सुखी होगी आतंकवाद के खंडहर पर वही सच्ची शायद श्रढांजलि होगी .
संगीता स्वरूप (गतिका )
|
|
| | |
|
|
|
|
|
|
|