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| Wednesday 20 August, 2008 |
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Mukhoton Se Dhake Chehare
इंसान के चेहरे कितने मुखोटों से ढके होते हैं कि पहचानना मुश्किल होता है कि असली चेहरा कौन सा है.
हम लाख दावा कर लें कि इस इंसान को, अच्छी तरह जानते हैं, उसकी नस - नस पहचानते हैं पर इतने विश्वास के बाद भी अक्सर धोखा खाते हैं क्यों कि हम चेहरे पर चढ़े मुखोटे को ही केवल पहचान पाते हैं.
अचानक बदल जाता है मुखोटा और हम हतप्रभ से रह जाते हैं यह सोचते हुए कि शायद असली चेहरा यही है, और फिर उस चेहरे को पढ़ते हुए सोचने लगते हैं कि अब तो हम असलियत पहचान गये हैं इस इंसान को अच्छी तरह जान गये हैं.
परंतु फिर विश्वास टूट जाता है यह देख कर कि यह भी चेहरे पर ओढ़ा हुआ एक मुखोटा ही था ज़िंदगी में मिला , एक और धोखा ही था.
यही धोखा खाते- खाते सारी ज़िंदगी खत्म हो जाती है और अंत में खुद ज़िंदगी ही हमें धोखा दे जाती है.
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