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| Wednesday 20 August, 2008 |
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AHAM (MAIN)
ये आसमां और मेरे अरमान दूरी दोनो की एक जितनी संभव जब-जब आसमां तक निगाह उठी अरमानों का रेला सामने चला आता है.
ये तारे और मेरी चाहतें दोनो की एक जितनी संख्या संभव जब- जब तारे गिनने की कोशिश की मेरी चाहतों का ढेर लग जाता है.
ये नदियाँ और मेरी कल्पनाएँ दोनो का स्वभाव एक जैसा संभव जब - जब लहरों को गिनना चाहा मेरी कल्पना का समुद्र सामने आ जाता है.
तुम और मैं , मैं और तुम एक जैसे संभव जब भी तुम तक पहुँचने की कोशिश की मेरा 'मैं ' मेरे सामने आ जाता है.
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