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| Wednesday 20 August, 2008 |
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"विश्वास"
विश्वास -- यह शब्द कह कर इंसान यह बता देता है कि कहीं न कहीं उसके ज़ेहन में अविश्वास है.
इंसान -- खुद ही शक पैदा करता है और अपनी इस कमज़ोरी को दूसरों पर आरोपित कर देता है.
यह कह कर कि तुमने मेरे विश्वास को तोड़ा है.
ये विश्वास क्या है?
मेरी नज़र में... अपने विश्वास पर अति विश्वास अंधविश्वास है और शक की ज़रा सी दरार विश्वासघात है.
फिर इंसान अपने से अधिक यकीन दूसरों पर क्यों करता है?
अपने यकीन पर यकीन रखोगे तो न अंधविश्वास होगा और न ही विश्वासघात.
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